मैं कोई सेलिब्रिटी नहीं हूं. पेशे से इंजीनियर हूं. सैलरी ठीक-ठाक है. इतनी कि घर, गाड़ी, बिजली-पानी और अच्छा फोन चल सके. जिंदगी की चेकलिस्ट लगभग पूरी है. लेकिन…मनुष्य का अस्तित्व अकेले नहीं खिलता. उसे भीड़ चाहिए. कंधों की गर्माहट चाहिए. आँखों की नमी चाहिए. होंठों की मुस्कान चाहिए.
आज हमारी जेब में एक ऐसा डिवाइस है जो हमें पूरी दुनिया से जोड़ता है फिर भी हमारे आस-पास कोई नहीं होता जिससे हम मन खोलकर कह सकें–“आज मन उदास है… ”
Facebook के हज़ारों दोस्त, Instagram के हज़ारों फॉलोअर्स, WhatsApp के दर्जनों ग्रुप; हर तरफ कनेक्शन का भ्रम है. मैं कुछ लिखूँ तो लोग लाइक करते हैं, कमेंट करते हैं, कभी तारीफ़, कभी बहस, कभी मज़ाक भी करते हैं. जन्मदिन पर बधाइयों की बाढ़ आ जाती है. खुशी पर Congrats, दुख पर Stay Strong या Take Care.
वर्चुअल दुनिया पूरी सजधज के साथ यह यकीन दिलाती है कि मैं अकेला नहीं हूं लेकिन असली दिक्कत तब शुरू होती है जब स्क्रीन बंद होती है. जहाँ दोस्त के कंधे पर सिर रखकर मन हल्का होना चाहिए, वहाँ तकिया भीगा पड़ा है. जहाँ कोई सामने बैठकर कहे-“चल यार, चाय पीते हैं”…वहाँ सिर्फ़ मोबाइल स्क्रीन जलती है.
मनोविज्ञान कहता है कि मनुष्य ‘टच’ से जुड़ता है, ‘टेक्स्ट’ से नहीं. Emoji से नहीं आँखों से जुड़ता है. Comment से नहीं आवाज़ से जुड़ता है. Screen से नहीं साँसों से जुड़ता है. Digital interaction मस्तिष्क में उतना oxytocin नहीं छोड़ता जितना आमने-सामने की मुलाकात, हँसी, स्पर्श या आँखों का मिलना छोड़ता है. यही वजह है कि ऑनलाइन जुड़े होने के बावजूद हम भीतर से खाली महसूस करते हैं. हमने वर्चुअल रिश्तों को रियल का विकल्प मान लिया है. लेकिन सच यह है कि जब स्क्रीन बंद होती है तो सामने तन्हाई का खाली कमरा होता है.
हमारी प्राथमिकताएं बदल गई हैं. रिश्ते अब “टाइम मिलने पर” निभाए जाते हैं, जबकि असली दोस्ती तो वक्त निकालकर निभाई जाती थी. जब तक कोई आपके साथ चुपचाप बैठकर आपकी चाय में चीनी नहीं घोलता, तब तक दोस्ती पूरी नहीं होती. मन को अब भी दोस्त चाहिए. वो दोस्त जो बिना पूछे सब समझ जाए. जो आँसू भी देख ले और हंसी भी चुरा ले. जिसके साथ चुप्पी भी पूरी बातचीत बन जाए. Birthday से लेकर ब्रेकअप तक..हर मोड़ पर कोई चाहिए जो ‘पास’ हो.
मन उम्मीद रखता है कि शायद कल कोई पुराना दोस्त दरवाज़ा खटखटा दे. शायद किसी चौपाल पर कोई भूला हुआ यार मिल जाए. शायद बरसात में कोई साथ चाय पीने आ जाए. शायद मोबाइल से बाहर, असली दुनिया लौट आए.
क्योंकि दोस्ती जब तक ‘रियल’ न हो; सुख अधूरा है और दुःख बेहिसाब. परिवार चाहे कितना भी प्यारा हो, दोस्त का विकल्प नहीं हो सकता. और शायद दोस्त मिलें या न मिलें… उनकी तलाश ज़रूरी है. क्योंकि यही तलाश हमें इंसान बनाए रखती है..
लड़कियाँ चुप रहीं… पर समय हमेशा एक-सा नहीं रहता। एक दिन सदियों की चुप्पी के भीतर हल्की-सी दरार पड़ती है। किसी घर में एक लड़की पहली बार ज़ोर से हँस देती है। किसी स्कूल में एक लड़की हाथ उठाकर पूछ लेती है अपना सवाल। किसी दहलीज़ पर एक लड़की यह कह देती है- “मेरी ज़िंदगी का फ़ैसला मैं खुद करूँगी।”
और तब इतिहास की मोटी किताब में एक नया पन्ना खुलता है। एक लड़की ऐसी भी जन्म लेती है जो अपनी माँ की अधूरी इच्छाएँ अपनी आँखों में लेकर चलती है, और अपनी बेटी के लिए थोड़ा और खुला आसमान छोड़ जाती है। एक नई सुबह है। अब लड़कियाँ सिर्फ़ चुप नहीं रहेंगी… वे बोलेंगी, लिखेंगी, चलेंगी, उड़ेंगी और उनके पंखों की आहट से दुनिया को समझ में आएगा कि आधा आसमान सदियों से चुप था।
पर शायद तुम यह सब पढ़ते हुए सोच रही हो कि वह लड़की कौन है जो दीवारों में दरार बनती है, जो चुप्पी को आवाज़ में बदल देती है, जो अपने हिस्से का आसमान माँगती है।
सच तो यह है.. वह कोई दूर की कहानी नहीं है। वह कोई किताब की नायिका नहीं है। वह लड़की… तुम ही हो। तुम्हारी हँसी में किसी पीढ़ी की आज़ादी छिपी है, इसलिए आज नहीं, अभी से याद रखना तुम सिर्फ़ किसी घर की बेटी नहीं, किसी का बोझ नहीं, किसी परंपरा की खामोश कड़ी नहीं। तुम एक पूरी कहानी हो, एक पूरा आसमान हो। 🌸
वो दिन…महीना अगस्त का था पर डेट ठीक से न मुझे याद है, न उसे। पहली बार उसे मेट्रो स्टेशन के गेट पर देखा था। समय ने मेरी कलाई की घड़ी उतारकर अपने पास रख ली थी। उसके खुले बाल… उफ्फ…
हवा उसकी खुली ज़ुल्फ़ों को जैसे ही छूती थी वो लहलहा उठती थी । फिर जब हमारी नज़रें एकाएक मिलीं तो मेट्रो प्लेटफॉर्म की घड़ी की सुइयाँ उल्टी चलने लगी।
मैंने बस इतना कहा-“चलें?” वो कुछ नहीं बोली…न हामी, न इनकार… बस एक हल्की-सी मुस्कान उसके होंठों पर आई जैसे कोई पुराना राज़ अचानक याद आ गया हो। अगले ही पल बिना कुछ कहे, बिना कुछ पूछे वो मेरे साथ चल दी।
शहर का शोर अब जैसे किसी पुराने रेडियो की तरह धीरे-धीरे मद्धम हो रहा था और पेड़ों की पत्तियों में कोई अनकहा गीत बजने लगा था। उस पल की ख़ामोशी कोई आम ख़ामोशी नहीं थी। वो पहली चुप्पी थी जिसने हमारे बीच कुछ नया जन्म दिया।
वो चुप थी…मगर उसकी ख़ामोशी में मौसम बदल रहे थे। कभी गर्मी की दोपहर-सी तपिश, कभी सर्दियों की लंबी रात-सी सुकून तो कभी बारिशों-सी बेपरवाह भीगती बातों की महक। धड़कनों की धीमी सरगम, निगाहों की डोर में बंधे वादे और दो कंधों के बीच हवा में तैरते वो अल्फ़ाज़ जो बोले नहीं गए मगर महसूस ज़रूर हुए। बस…वहीं पहली चुप्पी टूटी थी और एक कहानी शुरू हो गई…
फिर मेरी उंगलियाँ उसके हाथों की ओर बढ़ीं और जैसे ही मैंने उसकी हथेलियों को छुआ वो हल्का-सा सिहर उठी …मानो किसी पुरानी जादुई किताब का पन्ना खुल गया हो या गुलाब की पंखुड़ी पर पहली बार ओस गिरी हो। उस एक छुअन में मेरे भीतर जैसे कोई बग़ीचा उग आया जहाँ सूरजमुखियाँ मुस्कराने लगेऔर उसकी होठों की वो शर्मीली सी मुस्कान, ओस बनकर मेरी हथेली पर ठहर गई।
पहली बार उसके अधरों से शब्द फिसले-“क्या आप कुछ कहना चाहते हैं?”
मैंने उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा- “तुम आज… जैसे चाँदनी में भीगती किसी राग की पहली तान लग रही हो जिसे सुनते ही मन मंदिर झूम उठता है।” (ऐसा मैंने कहा नहीं लेकिन मन ही मन सोचा ज़रूर)
वो मुस्कुराई…उसकी उस एक मुस्कान से पत्थर की कठोर दीवार पर उगे काँटों की बेलों पर गुलाब की कोपलें फूट पड़ीं।वो मुस्कुराती रही…नज़रें झुकीं पर मन की आवाज़ जैसे कह रही थी,“बस यही तो सुनना था तुमसे…”
उस पल वक़्त ने अपने क़दम रोक दिए। चारों ओर लोगों की चहल-पहल, गाड़ियों का शोर और हवा में कहीं दूर से आती एक मीठी तान…हम थे,हमारी धड़कनों की अनकही लय थीऔर वो संकोच जो अब धीरे-धीरेप्रणय की पहली बूँद बनकरउसके गालों पर गुलाबी रंग भर रहा था।
हमारी बातचीत शुरू हुई…पहले शब्दों से, फिर निगाहों से, फिर मौसमों से। पहले कुछ संकोच के साथ, फिर धीरे-धीरे खुलती हुई और फिर एक बेतहाशा बाढ़ की तरह जैसे कोई नदी अचानक समंदर से मिल जाए…
उसकी हँसी किसी तितली की तरह आकर मेरे काँधे पर ठहर जाती…हल्की, रंगीन और जादू से भरी हुई। जैसे ही वह मुस्कुराती, मेरी रूह के वीरान कमरों में उजाले की एक नर्म लहर दौड़ जाती। उस दिन पहली बार महसूस हुआ कि उसकी हँसी मेरे थके हुए मन के लिए किसी एनर्जी ड्रिंक से कम नहीं… एक ऐसा अमृत जो हर थकावट को बहा ले जाए। उसकी खिलखिलाहट में एक ऐसी कशिश थी जो मेरे मन की सादी कैनवास पर हर बार कोई नया रंग बिखेर देती। जब मैं उसे सुनता तो लगता जैसे कोई भूला-बिसरा गीत कभी बहुत अपना था जो अचानक दिल के किसी कोने में बजने लगा हो….धीमे-धीमे…. मगर पूरी शिद्दत से….
ये हमारी दूसरी मुलाकात थी लेकिन तब से लेकर आज तक उसकी बातें कभी खत्म नहीं हुईं। उसकी आवाज़ अब भी हवा में घुली रहती है और जब वो पास नहीं होती तो उसकी स्मृति किसी अधूरी कविता की तरह दिल में गूँजती है। तब से लेकर आज तक उसकी हर बात मेरे लिए एक कविता बन गई है। उसकी हर मुस्कान एक दुआ और उसका साथ… मेरी ज़िन्दगी की सबसे खूबसूरत वजह।
कभी-कभी सोचता हूँ अगर हमारी पसंद-नापसंदों को तराजू में तौलकर रिश्ता तय होता तो शायद हम कभी साथ न हो पाते।
उसे सलमान ख़ान की अदा भाती थी और मुझे उसका अंदाज़ ज़रा भी नहीं सुहाता था।
वो जिस नेता को उम्मीद की किरण समझती थी, मैं उसी में नफ़रत की परछाइयाँ देखता था।
वो चायनीज़ पसंद करती थी और मुझे उसकी खुशबू तक बेचैन कर देती थी।
उसे भीड़ का कोलाहल जीवन लगता था, मुझे तन्हाई का सुकून अमृत सा।
उसे आसमान की ऊँचाइयाँ पुकारती थीं और मैं धरती की गहराइयों में जड़ें तलाशता था।
वो गर्मियों की धूप में खिलती थी, मैं सर्द रातों की रज़ाई में खुद को समेट लेना चाहता था।
फिर भी न जाने कैसे…जैसे किसी पुराने लोक-कथा की धुँधली याद के सहारे हम दो विपरीत दिशाएं एक ही पगडंडी पर कदम-दर-कदम चलने लगे और फिर एक दिन हम एक-दूजे के हो गए।
उसके खुले बालों में तो सच में कोई रहस्य है, उसके खुले बाल जैसे काजल से बुनी रात जिसमें चाँदनी ने खुद को खो दिया हो, हर लट मानो किसी शायर की अधूरी पंक्ति जो मेरी रूह में उतर कर मुकम्मल हो जाती है।उसकी काजल-सी गहराइयों वाली ज़ुल्फ़ों का जादू और मेरी छोटी-छोटी मासूम-सी आँखों में छुपा हर सपनाएक-दूसरे में यूँ रच-बस गए जैसे दो विपरीत राग एक ही सुर में मिलकर नुसरत साहब के क़व्वाली गा रहे हों।
उसकी आँखें….नहीं…वो केवल आँखें नहीं थीं…वो गुलमोहर के पेड़ पर झूलती मासूमियाँ थीं जहाँ रेशमी झूले पर बैठी हर शरारत मेरी ओर देखकर मुस्कुराती थी।
हम दोनों मिले…जैसे रेगिस्तान को अचानक कोई सरोवर मिल जाए या जैसे तानपूरा खुद ही किसी
अनजाने राग पर झूम उठे और बस…मिलते चले गए जैसे कोई शंखनाद धीरे-धीरे मौन में बदल जाए पर
उसकी प्रतिध्वनि सदा जीवित रहे।
~दिलीप
उसकी हँसी…उफ़्फ़! वो कोई हँसी नहीं बल्कि किसी प्रभात की पहली किरण है जो मेरी रूह की अंधेरी गलियों में सूरज का दीपक रख देती है।
तो मैं…उसके नाम एक झप्पी भेज रहा हूँ…उन लम्हों के लिए जिनमें उसने मुझे सिर्फ़ चाहा नहीं बल्कि मेरी हर परत को, मेरी हर खामोशी को अपनी बाँहों की भाषा में पढ़ लिया। क्योंकि वो सिर्फ़ ‘मेरी हमसफ़र’ नहीं है, मेरी कहानी की सबसे जादुई और सबसे अलौकिक परिभाषा है।
जब उदासी के बादल मेरे दिल पर बरसते हैं, मैं चुपचाप उसके पास चला जाता हूँ जैसे कोई कश्ती अपने किनारे से लिपट जाए। उसकी कोमल बाहों में जब भी समाता हूँ…लगता है किमैंने सारी दुनिया जीत ली हो जैसे किसी टूटते सितारे को गिरने से पहले एक आकाश मिल जाए। बस एक ही ख्वाहिश जगी…उसका हाथ हो… उसका साथ हो…
वो कोई जादूगरनी है, उसके गले लगते ही हर मुश्किल मोम की तरह पिघल जाती है, हर दुख बादल बनकर उड़ जाता है, हर उलझन कंघी में उलझे बालों-सी सुलझ जाती है। उसकी साँसों की लय में मेरी बेचैनी थम जाती है जैसे कोई बंजारा आखिरकार अपना घर पा ले। जब ज़िंदगी की रेत हाथ से फिसलती है तो उसकी गोद मेरे लिए सबसे मुकम्मल शरण बन जाती है।
मुझे उसके साथ जीना है… सिर्फ़ वो पल नहीं जब सब सरल हो बल्कि वो भी जब पूरी कायनात एक बोझ लगे। मैं उजाले में भी उसका चेहरा चाहता हूँ और अंधेरे में बस उसकी ऊँगली…जैसे रात की स्याही में कोई तारा। मैं उसके साथ पहाड़ों की चोटी पर सांस लेना चाहता हूँ और समुद्र की सबसे शांत गहराई में उतरकर उसकी चुप्पी में डूब जाना चाहता हूँ। ज़िंदगी के हर मौसम में, हर रौशनी, हर अंधेरे, हर तूफ़ान और हर ठहराव में मुझे सिर्फ़ उसका साथ चाहिए।
अब जब ये सब लिख रहा हूँ तो लगता है कि शब्द भी थककर उसकी गोद में सिर रख देना चाहते हैं, वो भी अब लफ़्ज़ नहीं रह गए वो उसका स्पर्श चाहते हैं, उसकी हथेली की गर्माहट में लिपटकर सो जाना चाहते हैं।
शरीक-ए-सफ़र के नाम…जो साथ चलती नहीं बल्कि मेरे अंदर धड़कती है!
ॐ ट्रंप टैरिफ, ॐ चीन की चाल, ॐ बाज़ार का हिसाब ॐ पाकिस्तान के दिल में युद्ध का ख्वाब ॐ इज़रायल की गोलेबारी, ॐ ईरान का ग़ुस्सा ॐ तेल का भाव, ॐ हथियार का किस्सा
ॐ वोट चोरी, ॐ EVM, ॐ चुनाव आयोग का भजन ॐ नरेंद्र मोदी, ॐ मन की बात, ॐ फोटो-सेशन ॐ पहलगाम की बर्फ़, ॐ घाटी का सन्नाटा ॐ हिन्दू-मुसलमान, टीवी पर महाभारत की गाथा
ॐ नफ़रत का नृत्य, ॐ भाईचारे का क़त्ल ॐ WhatsApp का सत्य, ॐ इतिहास का मल्ल ॐ न्याय में भी जात, ॐ आस्था में जंग ॐ भूखे पेट में राष्ट्रगान का रंग
ॐ गगनचुंबी मीनार, ॐ गिरता मकान ॐ आत्मनिर्भरता में विदेशी सामान ॐ नौजवान की बेरोज़गारी, ॐ भक्त का जयकार ॐ बंशी बजा रहा तानाशाह अवतार
ॐ किसान का रोष, ॐ लाठी की मार ॐ लहू से सना लोकतंत्र का द्वार ॐ महंगाई के मंदिर में दलालों की पूजा ॐ भूख की आरती, ॐ रोटी का दूजा
ॐ धर्म की आड़, ॐ सत्ता का खेल ॐ जनता बेवक़ूफ़, ॐ नेता का मेल ॐ कश्मीर की क़ैद, ॐ मणिपुर की आग ॐ दिल्ली के गलियारे में मुनादी का राग
ॐ देशभक्ति के नाम पे गद्दार का तमगा ॐ अंधे की आँख, ॐ बहरों का भागा ॐ सच बोलने पर जेल, ॐ झूठ पर इनाम ॐ आकाश में गूँजता भारत महान!
ॐ परम PR, ॐ परम प्रचार, ॐ परम प्रपंच ॐ फिल्मी सीन, पर स्क्रिप्ट है पंच ॐ जुमलों का अमृत, ॐ झूठ का प्रसाद ॐ नागार्जुन भी पूछें-कहाँ गया संवाद?
आज हम अपनी आज़ादी की सालगिरह मना रहे हैं। शुभकामनाएं उन सभी को जिन्होंने इस आज़ादी के लिए अपना खून-पसीना बहाया और बधाई उन महानुभावों को भी जो तब भी धार्मिक लड़ाई में फंसे थे और 78 साल बाद भी वहीं अटके हैं। सोचा इस मौके पर ‘विकास’ की बात कर ली जाए वो जादुई शब्द जो नेताओं के दिल के सबसे करीब होता है। सत्ता में हों तो विकास उनकी जेब में होता है और विपक्ष में हों तो उन्हें लगता है कि विकास देश छोड़कर भाग गया है। आम आदमी विकास ढूंढ रहा है। कुछ नेता दावा कर रहे हैं कि उनके शासन में विकास दौड़ रहा है तो कुछ दावे की हवा निकालने में लगे हैं।
चलिए गंभीरता से बात करते हैं। 1947 में जब आज़ादी मिली तो देश के पास बस आज़ादी थी पर संसाधन नहीं थे। उम्मीदें थीं, हौसला था और एक सपना था– एक मजबूत, आधुनिक, आत्मनिर्भर भारत का। तब मोबाइल या इंटरनेट की उम्मीद करना वैसा ही था जैसे कुएँ से WiFi माँगना।
विकास एक सतत (continuous) प्रक्रिया है जो पीढ़ियों में पनपता है। कल को उड़ने वाली बसें और रोबोटिक क्रांति भी आ जाएगी तो इसका मतलब है नहीं कि ये सब 1980 में क्यों नहीं हुआ? जो काम आज हो पा रहे हैं वो 1947 में संभव नहीं थे। हम समय के साथ बढ़ते हैं, सीखते हैं। मानव सभ्यताओं में इसे ही revolution नाम दिया गया है। सोचिए आज AI का जमाना है अब कोई ये कहे कि ये नेहरू ने क्यों नहीं किया तो उसे क्या ही कहा जायेगा।
सब बातों के इतर याद रखिये हमने 78 सालों के इस सफर में बहुत कुछ हासिल किया—
संविधान मिला, जिसने हमें लोकतंत्र और समानता का आधार दिया। नियम, कानून बने और राजा की जगह हमने अपने प्रतिनिधि ख़ुद से चुनना शुरु किया।
IIT, IIM, AIIMS जैसे संस्थान बने जो आज भी भारत की प्रतिभा की पहचान हैं।
ISRO ने चांद, मंगल, सूर्य तक अपना झंडा गाड़ा वो भी कम बजट में जबकि दुनिया अरबों डॉलर खर्च करती रही।
DRDO ने मिसाइल से लेकर रक्षा तकनीक तक आत्मनिर्भरता दी।
नवोदय विद्यालय बने, जिससे गांव-कस्बे के बच्चों को भी अच्छी शिक्षा का मौका मिला।
बड़े-बड़े डैम, पावर प्रोजेक्ट, पुल, सड़कें बनीं जिनको नेहरू ने ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ कहा।
पाकिस्तान की तरह किसी एक धर्म की सोच पर नहीं बल्कि सबको साथ लेकर बढ़ने का रास्ता चुना।
गुटनिरपेक्ष आंदोलन में अगुवाई की, दुनिया में इज्ज़त कमाई…तब विदेश में शो और इवेंट करवाने की ज़रूरत नहीं पड़ी।
1965, 1971 और 1999 में देश की सेना ने दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया।
अपनी सुरक्षा सुनिश्चित की और 1974 में हम परमाणु सम्पन्न हुए।
हरित क्रांति ने अनाज में आत्मनिर्भर बनाया, श्वेत क्रांति ने दूध में दुनिया में नंबर-1 कर दिया। सूचना क्रांति ने भारत को IT हब बनाया।
1991 के आर्थिक सुधारों ने विदेशी निवेश, रोजगार और व्यापार के नए दरवाजे खोले।
मनमोहन सिंह के कार्यकाल (2004–2014) में GDP 700 अरब डॉलर से बढ़कर 2 ट्रिलियन डॉलर हो गई लगभग 185% वृद्धि, वह भी वैश्विक मंदी के बावजूद। मोदी सरकार के 10 साल (2014–2024) में GDP 2 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 3.7 ट्रिलियन डॉलर हुई–85% वृद्धि।
अब आज की स्तिथियों पर भी बात हो जाए—
➼ बेरोजगारी का नया कीर्तिमान SSC, रेलवे, बैंक, आर्मी… सरकारी नौकरियों की भर्तियाँ ठप के बराबर हैं। गांव-कस्बे का युवा जो इनकी तैयारी करता था उसके पास अब लिमिटेड ऑप्शन हैं। ‘अग्निवीर योजना’ ने सेना में जाने का गर्व भी छीन लिया। और बाकी के लिए प्रधानमंत्री का जवाब ‘पकौड़े तलना भी रोजगार’ है।
➼ चुप्पी का स्वर्णिम नियम मणिपुर जलता रहा, प्रधानमंत्री चुप रहे। चीन सीमा पर अतिक्रमण करता रहा लेकिन उनका नाम लेने से भी डर लगता है। लेकिन मुसलमान वाला एंगल मिलते ही मंच से आवाज़ गूंजती है और भीड़ तालियां बजाती है।
➼ वॉशिंग मशीन का कमाल जो नेता कल तक “सबसे बड़ा भ्रष्टाचारी” कहलाते थे, भाजपा में आते ही दूध से धुले हो जाते हैं। जनता ने इस तकनीक को ‘वॉशिंग मशीन’ का नाम दिया है।
➼ महंगाई का U-टर्न 2014 से पहले नारे थे- “बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार”। अब कहा जाता है- “बचत कीजिए।” मनमोहन सिंह महंगाई का ‘म’ नहीं बोलते थे और अब नरेंद्र जी ‘मणिपुर’ नहीं बोलते।
➼ पहले विरोध, अब गर्व मनरेगा, आधार, GST, DBT ये सब 2014 से पहले की योजनाएं हैं। तब पश्चिम के एक राज्य के मुख्यमंत्री इनका विरोध करते थे, अब इन्हीं को अपनी उपलब्धि बताते हैं।
➼ जांच एजेंसियां: अब पालतू हथियार CBI, ED, IT पहले ‘पिंजरे में तोते’ कहे जाते थे, अब विरोधियों को डराने का हथियार हैं। कांग्रेस हो, TMC हो या AAP जैसे ही केस बनता है अगर नेता भाजपा में आ जाए तो केस धुल जाता है।
➼चुनावी भाषण: झूठ और नफरत का कॉम्बो पैक मंगलसूत्र छीन लेंगे, घर छीन लेंगे, गाड़ी छीन लेंगे ..ये बातें प्रधानमंत्री के भाषणों में सुनने को मिल रही हैं। इस सब के लिए बीजेपी ने टाइगर राजा सिंह, साक्षी महाराज, गिरिराज जैसों को रखा है। कम से कम प्रधानमंत्री को पद की मर्यादा का ख्याल रखना चाहिए। सोचिए….जो आदमी पुलवामा में शहीद हुए जवानों के नाम पर वोट मांग ले वो कितना निर्ज्जल हो सकता है (ये बात किसी भक्त को बताता हूँ तो वो पहले विश्वास नहीं करता लेकिन जब मैं उसे वीडियो भेज देता हूँ तो हकलाने लगता है, “मेले मोई जी ऐता नहीं बोल तकते”)
और हाँ… जो लोग व्हाट्सएप पर 70 साल का राग।अलापते-गुनगुनाते नहीं थकते, उनके लिए एक छोटी सी गणित क्लास भी हो जाए।।1947 में जब देश की अंतरिम सरकार बनी तो प्रधानमंत्री नेहरू थे पर उसमें कई गैर-कांग्रेसी मंत्री भी थे। बाकियों को छोड़ भी दें तो श्यामा प्रसाद मुखर्जी हिंदू महासभा से थे।।फिर 1952 में पहले आम चुनाव हुए और कांग्रेस 1977 तक सत्ता में रही। 1977 में इंदिरा गांधी हारीं तो जनता पार्टी आई। प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई और सरकार में जनसंघ का समर्थन जिसमें अटल बिहारी वाजपेयी मंत्री भी थे। फिर बीजेपी बनने के बाद अटल जी लगभग 6 साल प्रधानमंत्री रहे। अब 2014 से मोदी जी 11 साल से कुर्सी पर हैं। 78 साल की आज़ादी में ज़रा जोड़-घटाव कर लीजिए। कौन कितना राज कर चुका और ‘70 साल’ का जो तीर आप रोज़ छोड़ते हैं वो आखिर किसके कलेजे में लगता है, ये भी सोच लीजिए। इतिहास में “कांग्रेस का 70 साल” जितना हिस्सा है, उतना ही बीजेपी और उसके राजनीतिक पुरखों का भी नाम लिखा है। बाकी, गणित में फेल हैं तो व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के एडमिशन फॉर्म भरे पड़े हैं।
ख़ैर… नफ़रत की अफ़ीम इस तरह चटा दी गयी है कि पढे़ लिखे लोग भी तर्क वितर्क पर बात नहीं करते।प्रधानमंत्री आते हैं और एक नया शिगूफा़ छोड़ते हैं और लोग आंख बंदकर उनपर विश्वास करते हैं। व्हाट्सएप पर हिन्दू अस्मिता, सनातन का गर्व दिखाकर ब्रेनवाश किया गया है। टीवी और व्हाट्सऐप अब नया संविधान हैं। किस पर हँसना है, किससे डरना है, किसे गाली देनी है…सब वहीं से तय होता है। हिंदू अस्मिता और सनातन गर्व के नाम पर दिमाग का वॉश हो चुका है। गली-मोहल्ले, पान की दुकान, फेसबुक-व्हाट्सऐप बहस के मुद्दे…. अब नेता नहीं, Algorithm तय करते हैं। हम चाहते तो गाजर खाना हैं लेकिन हमारे सामने जानबूझकर रोज कद्दू ही परोसा जा रहा है और हम मजे से रोज वही खा रहे हैं। किसी गाय-भैंस, भेड़ों की तरह हमें कोई शोर मचाकर हाँक रहा है और हम हंके चले जा रहे हैं।
हालात ऐसे हैं कि अगर भगवान राम भी आकर नरेंद्र जी की आलोचना कर दें और कहें-“मैं इन्हें नहीं, सबको लाया हूँ” तो लोग राम जी को भी देशद्रोही, पाकिस्तानी और एंटी-हिंदू कह देंगे।
निचोड़ यही है कि विकास किसी एक नेता या एक पार्टी की जागीर नहीं। ये पीढ़ियों की मेहनत का नतीजा है। लेकिन अगर हम हर उपलब्धि का श्रेय सिर्फ अपने पसंदीदा नेता को देंगे, हर असफलता का दोष दूसरों पर डालेंगे और तर्क के बजाय नफरत पर तालियां बजाते रहेंगे तो हम विकास नहीं, सिर्फ विभाजन को आगे बढ़ाएंगे।
देश तभी बदलेगा जब भक्त विचार करना शुरू करेंगे, Forward करना नहीं।
बहुत समय पहले की बात है… यानी कोई 10-12 साल पहले…जब लोग अख़बार पढ़ते थे और न्यूज एंकर गला फाड़ने की शुरुआत कर चुके थे। फॉरवर्ड भेजना सिर्फ़ चुटकुले तक सीमित था। भारतवर्ष नामक राष्ट्र एक अजीब मानसिक संक्रमण से ग्रस्त हो गया था: “समस्या नहीं बची, बस आरोप बच गए थे।”
हालात कुछ यूं थे कि संसद चलती नहीं थी पर WhatsApp ग्रुप जरूर चलता था। सड़कें टूटी थीं पर वोटर का धैर्य मरा नहीं था। सीबीआई ऑफिस अब किचन जैसा हो गया था जो पार्टी खाना पकाए उसी के मसाले इस्तेमाल होते थे। धरती कराह उठी थी। किसान खेत में नहीं, क्रेडिट कार्ड के बिल में दफन हो गए थे। युवाओं की नौकरियां नहीं गईं बल्कि जैसे सिग्नल पे डेटा चला जाता है वैसे ही गायब हो गईं। सरकारी तंत्र ICU में था और डॉक्टर हॉस्पिटल से गायब। गरीब रोटी मांग रहा था तो उसे शौचालय योजना का लिंक भेजा जा रहा था। महिला सुरक्षा मांग रही थी तो उसे बेटी बचाओ का लोगो फ़ॉरवर्ड किया जा रहा था। जनता ने खुद से ही उम्मीद छोड़ दी थी और नेताओं से सवाल पूछना बहुत रिस्की हो गया था। धरती माँ भी त्राहि-त्राहि करने लगी थी। कलियुग अपने चरम पर पहुँच गया था। भ्रष्टाचार इतना बढ़ गया कि घोटालों के नाम से ही मंत्र बन गए –“2G, कोयला, राष्ट्रमंडल… स्वाहा!” महंगाई ऐसी थी कि लोग उसे डायन कहकर पुकारते थे। महिलाओं पर अत्याचार ऐसा कि टीवी पर ‘ब्रेकिंग’ भी थकने लगी थी। किसानों की आय आधी क्या हुई,आत्महत्याएं डबल हो गईं। पूरा देश WhatsApp यूनिवर्सिटी से “हिंदू खतरे में है” का पीएचडी कर चुका था।
इन सब से परेशान राष्ट्र के तमाम ‘WhatsApp Certified Devotees’ एक गुप्त गुफ़ा में बुलाए गए। इन्होने तय किया- बहुत हुआ अत्याचार….. अबकी बार…. तय हुआ कि सभी भक्तगण एक कठिन तपस्या करेंगे। ये कोई आम तपस्या नहीं थी। सभी ने “Only Cow Urine” डाइट ली, रातभर नमो-नमो का कीर्तन किया। खुद को बेल्ट और चप्पलों से पीटा और सुबह उठकर फिर से ट्विटर खोला। Facebook पर “भारत माता की जय” लिखकर 300 बार शेयर किया, DP पर झंडा लगाया और “हर समस्या का हल: मोदी” का लगातार पाठ किया। तब जाकर आकाश से एक जोरदार आकाशवाणी हुई। पहले तो नेटवर्क नहीं आया लेकिन फिर जोर से गूंजा-“हे भारत! तू अब ऐसे नहीं चलेगा…”और फिर दिव्य उद्घोषणाये हुई –“बहुत हुआ भ्रष्टाचार! बहुत हुई महंगाई! अब होगा न्यू इंडिया तैयार! किसानों की आय दुगनी होगी, करोड़ों रोजगार मिलेंगे, गुंडे होंगे सुधारगृह में, संस्थाएं होंगी स्वतन्त्र, काला धन आएगा: सबको मिलेगा 15 लाख!”
Whatsapp पर चाणक्य चचा इसी दिन के लिए लिखे थे-
“यदा यदा भ्रष्टाचार बढ़े, मंहगाई छूए आसमान,
किसान भूखे रह जाएं, नौकरियां गायब मान।
तब-तब देव उत्पति हो, चमके जैसे दीपक,
कहता ‘15 लाख देंगे’, सब ठीक हो जाएगा चुप-चाप।”
अग्नि, वायु, कैमरा और जुमले....चारों तत्वों को मिलाकर देवों ने गूगल फॉर्म भरा: “Application for Desh ka Messiah” कई उम्मीदवार आए-परंतु एक था जो भाषण नहीं देता था… ध्वनि विस्फोट करता था । काम नहीं करता था…उद्घाटन करता था। सच नहीं बोलता था…पर उसका झूठ सबको प्रेरित करता था।
देवताओं ने घोषणा की: “हे भक्तों! उतरो Timeline पर, तुम्हारा उद्धारक अवतरित हो चुका है। बस फिर क्या था…धरती पर अवतरित हुआ एक महामानव–नॉन-बायोलॉजिकल, टेफ़्लॉन-लेपित, आलोचना-प्रतिरोधीऔर LIVING GOD। चेहरे पर तेज, कैमरे के प्रति विशेष आकर्षण और पहनावा-चुस्त कुर्ता,चूड़ीदार पाजामा।
नाम? नाम में क्या रक्खा है? ईश्वर का नाम नहीं लेते हैं उन्हें किया जाता है दंडवत प्रणाम। तो कीजिए एक बार दंडवत प्रणाम। इस अवतार के पांच लक्षण थे-
उनके पाँच बड़े लक्षण, सुनो ध्यान से सब लोग
पहला है बातों का जादू, पर काम में हो थोड़ी चूक।
दूसरा झूठा आँकड़ा, जो सच से हो दूर भारी।
तीसरा कैमरा प्रेमी, हर वक्त लेते सेल्फी भारी।
चौथा हर दिन नया दुश्मन, चाहे हो घर का या कोई और।
पाँचवा विकास की कहानी, जो दिखे नहीं पर सुनाओ जोर जोर।
जैसे ही वो अवतरित हुए…TV चैनल्स ने आरती उतारी, IT सेल ने जन्म कुंडली बना दी और भक्तों ने अपना प्रोफ़ाइल नाम बदल लिया: उनका फौजी 🚩और इस प्रकार अवतार कथा पूर्ण हुई। Timeline पर भक्त उतरे, Comments में युद्ध छिड़ा और DM में गालियाँ बरसीं। जिसने सवाल पूछा वो ‘विरोधी एजेंडा’ कहलाया। जिसने आँकड़े दिए उसे पाकिस्तान भेजने की योजना बनी और जो मौन रहा… वो भक्तों का सबसे प्रिय नागरिक बना।
अब इस अवतार को कोई छू नहीं सकता, कोई टोक नहीं सकता, कोई टक्कर नहीं दे सकता। क्योंकि… वो सिर्फ़ नेता नहीं भावना है। विचारधारा नहीं, वायरल फॉरवर्ड है। वो टीका नहीं लगाता, नैरेटिव इंजेक्शन देता है। वो योजनाएँ नहीं बनाता, जुमला एंथम गाता है। और सबसे बड़ी बात वो गलती नहीं करता बस “तुम समझे नहीं” कहकर निकल जाता है।
अब भक्तों के नए श्लोक बन चुके हैं…GDP गिर रही है, इसका मतलब देश झुक नहीं रहा। बेरोज़गारी बढ़ रही है क्योंकि युवा अब नौकरी के लायक नहीं रहे। महंगाई देश के विकास का प्रमाण है और सबसे प्रचलित मंत्र-“पहले क्या हो रहा था वो बताओ पहले!”
अंततः अवतार अब पूरी सृष्टि में पहुंच चुका है। भक्त सब जगह हैं। आँसू वही, आरती वही, सेल्फ़ी वही। बस मंच बदला है,पहले इंडिया था अब ग्लोबल हो गया है। कथा जारी है…अवतार अमर है। भक्त अनंत हैं। आलोचना निषिद्ध है। प्रश्न पाप है।
“सतयुग बीते, द्वापर गया, कलियुग भयो संकीर्ण। लोभ-मोह की छाँह में डूबे, धरा भए भवभीर्ण॥ नव युग की अब वाणी फूटे, नव सर्ग रचे संसार। अवतरे अब अद्भुत नायक, भाल लिखे “मेक अमरीका ग्रेट” अपार॥
बहुतेरे अवतार आए। रामचंद्र जी आए, कृष्ण आए, मोदी जी तक आए पर भक्तों की आत्मा को तब पूर्ण तृप्ति मिली जब एक दिन अमेरिका की धरती पर प्रकट हुआ–एक अर्धविकसित बालों वाला, श्वेत नारंगी तेज से युक्त, डेमोक्रेसी का सन्यासी जिसका नाम था–डोनाल्ड जे. ट्रम्प !
जब लोकतंत्र Like और Subscribe पर टिका था, जब झूठ को वायरल और सच को Fact-check pending कहकर दरकिनार किया जा चुका था और जब WhatsApp यूनिवर्सिटी में चार साल का कोर्स चल रहा था तभी आह्वान हुआ…न न्यूयॉर्क से, न वॉशिंगटन से…बल्कि बनारस की एक गली से जहाँ कुछ समर्पित भक्त हवन-कुंड में पकोड़े के तेल से आहुति दे रहे थे। वो नारा लगा रहे थे- “ट्रम्प ही तारणहार है! बाइडन तो बस झक मार है!”
व्हाइट हाउस की ओर मुख करके,चार मोबाइल स्टैंड पर ट्रम्प चालीसा और “Build the Wall” का पाठ एक साथ चला और आहुतियों से उठे धुएँ ने 5G टावरों को छू लिया तब ब्रह्मांड की अलार्म घंटी बजी-डिंग डोंग! ट्रम्पावतार की री-एंट्री निकट है!
🔔 घंटा बजाओ ! भक्तिभाव में डेटा पैक जलाओ ! 🔔
यह ग्रंथ क्या है? यह सिर्फ चरित्र-मानस नहीं है, यह उस विचारधारा का बायोडाटा है जिसका मानना था कि अगर ट्रंप राष्ट्रपति बने तो भारत की GDP स्वर्गलोक तक जाएगी। जैसे ही ट्रंप का ट्वीट आएगा, पेट्रोल ₹50 हो जाएगा। 🎺 तो उठाओ मंजीरे और बजाओ एंटी-नेशनलों के कानों में डंका! क्योंकि अब प्रारंभ होता है-
🕯️ Trumpचरित्रमानस 🕯️
(भक्त-कलियुग की महागाथा, Twitter-युग के अवतार की अमर कथा)
(सच से डरे, भक्तों के सहारे, ट्विटर के अवतारी का स्तवन)
बुद्धि उलट, वचन बलशाली।
ट्विटर-हस्त, दिमाग कंगाली।।
सिर पे भूसा, मुख में गाली।
नारा फेंके, दे ज्ञान निराली।।
सत्य झूठ का मेल न जाने, दिन में सपना, रात दीवाने।
हाथ में फोन, ट्वीट हथियार, मुँह में गालियाँ, मन में विकार।
कहें भक्त -ये भाग्य हमारा, ट्रम्प ही है कलियुग अवतारा।
जो भी बोले, वही विधान, ट्रम्प ही राजा, ट्रम्प जहाँ!
बाल पीले, मन काला भारी, करता बात अजीब विचारी।
झूठ-मिथ्या के भाव प्रसारी।
ट्रम्प अवतरित, कथा विचारी।।
मेक अमेरिका ग्रेट कहे, तजि सत्य विचार।ट्रंप नाम जप भाव से, बनै भक्ताचार॥
भक्तिमार्ग है सस्ता अब, न साधन न तप।फॉरवर्ड कर दो रोज़ जो, वही चढ़े स्वर्ग पथ॥
🌟 Trumpचरित्रमानस: बालकाण्ड 🌟
( प्रभु ट्रंप की बाल-लीलाएँ)
बालक तन गोरो-गौर, कपिल केश जटा धार। मुख सूज्यो सदा लाल सा, उक्ति करे अपार।।
बालकपनहिं करि विलक्षण, कहे झूठ अस जान। ‘मैं हूँ बेस्ट!’ रटन करै, Truth संग वैर प्रमान।।
नारंगी वर्ण, कपार विशाल, बालक रूप, पर बुद्धि कमाल।
बालकपन से भाव अद्भुत थे, झूठ-मिथ्या में रंगे सुपुत्र थे।
बोले ‘Wow, so great!’, diaper में करे debate.
अमेरिका नामक पुण्यभूमि पर न्यूयॉर्कपुरी में एक अति बलिष्ठ, अति केसरी वर्ण बालक ने जन्म लिया। नाम धराया-डोनाल्ड। बाप था बिल्डर, माँ थी मोडेस्ट लेकिन बालक बालपन से ही दिव्य लक्षण वाला।
मूर्ख-मणि, दम्भ-निवासी। सुत बिल्डर कुल महान। बाल लीला करि जग हंसाया। भविष्य बने भूत समान।।
🌟 Trumpचरित्रमानस :यौवनकाण्ड 🌟
(जहाँ नारंगी नायक का यौवनकाल लीलाओं से नहीं, lawsuits से परिपूर्ण है)
बाल लीला समेटे प्रभु, पहुँचे जब यौवन आय। नारंगी तन दमकै अधिक, सुरभि ज्यों spray कर जाय॥
मुख-मंडल पर तेज़ नहीं था, पर make-up की चमक महान। Deal-maker कह स्वयं को, बोले- I am ladies man!
यौवन में जो करे प्रसंग, नारी संग अनंत। ट्रंपावतार अनूठा वह, जो court में बने बसंत।
तो भइया! ट्रम्प जी जवान हुए… और जवान होते ही समझ गए कि सत्य, नीति, मर्यादा वगैरह सिर्फ किताबों में अच्छी लगती हैं–असल ज़िंदगी में तो ब्यूटी क्वीन और बिजनेस डील ही धर्म है! जहाँ औरों का मन भगवद्गीता में रम गया, ट्रम्प का मन ‘Miss Universe’ में फंस गया! 👑
(जब सत्य रो पड़ा कोने में, और सिंहासन मुस्कुराया ट्विटर पर)
रंग बिरंगे पोस्टर लाया, “Make America Great” दोहराया। मंच सजाया, भीड़ जुटाई, झूठ की आँधी खूब चलाई।
टाई लाल, मुख से गर्जन भारी, कहे सभी नेता चोर हमारे। भक्तजन बोले -“वाह! यही है राव-भंजक अवतारी !”
व्हाइट हाउस सिंहासन भारी। ट्रम्प भयो महा अधिकारी। ट्वीटरहस्त सदा मचलाए। कभी उ. कोरिया, कभी ईरान डराए।।
ट्वीटर शंख बजावन हारा। प्रभु सदा फेंके वचन प्यारा।। China चोर! कहो दिन राती, पर खुद बेचें Chinese battery।।
CNN को दूषे भारी, Fox के संग सदा यारी। मीडिया को कहें झूठा, अपना झूठ न कभी छूटा।
भाइयो और भक्तगणो! अब वो ज़माना बीत गया जब नेता बनने के लिए अनुभव, नीति और कोई ढंग की डिग्री चाहिए होती थी। अब तो बस चाहिए–बालों में झोंका, ज़ुबान में धौंका और आत्म-प्रशंसा में चौका!
लोक तंत्र के मेले में, उठा तमाशा भारी। राजसिंहासन बैठ गया, झूठा नारंगी सवारी।
🌟 Trumpचरित्रमानस :मित्रकाण्ड 🌟
(“My Friend Donald” लीला -मोदी-ट्रंप मित्रता की Twitter Certified कथा)
मोदी गए लेने डॉनल्ड भाई, Welcome Hug विधि सब करवाई। जैसे ही Trump विमान से उतरे, गूंज उठे भक्त भव सागर उतरे!
सुनि ट्रंप बोले Howdy मोदी, हर्षित हुए भाजपाई थोड़ी। My Friend का जब जिक्र उठायो, भक्त कहें अरे विष्णु ही आयो!
नमस्ते ट्रंप सभा रचाई, साठ हज़ार ने ताल बजाई। ट्रंप मुस्काए, मोदी हँसे, भक्त बोले ये दृश्य रस भसे !
थैंक यू नैरेंद्र ! बोले डॉनल्ड, भक्तों के inbox गए default। मोदी बोले बड़े प्यारे, भक्त बोले-अब तो घर सारे हमारे!
ट्रम्पजी अमेरिका में राज कर रहे थे तब भारत में भी एक त्रिकालदर्शी चमत्कारी व्यक्तित्व शासन कर रहा था जिनके चेहरे पर चाय, मन में 56 इंच और जुबान पर ‘VIKSHIT INDIA’। फिर हुआ राजयोग –दो ‘विशेष महापुरुष’ एक दूसरे के दोस्त घोषित हो गए।एक ओर ‘MAGA’, दूसरी ओर ‘Make India Great Again by Clapping’!” 👏
अबकी बार ट्रंप सरकार जब भक्त करें पुकार। तो CNN काँपे रातभर, और GDP हारे हार॥
गूगल हारे, भक्त न हारे, ट्वीट जपे हर पल। बिना नतीजे ज्ञान मिला, मोदी-ट्रंप का बल॥
🚩 Trumpचरित्रमानस :विश्वविस्मयकाण्ड 🚩
(जब ट्रंपजी ने अंतर्राष्ट्रीय राजनीति को बना दिया WhatsApp Forward का अड्डा)
यूक्रेन में युद्ध लग्यो भारी, ट्रंप कहें -दोनों हैं न्यारे! ज़ेलेंस्की cute है, पुतिन classy ये लड़ाई थोड़ी sexy!
कहे चाइना ने सब बर्बाद किया, पर नाश्ते में नूडल्स खाया। Kung Pao Chicken my fav!, tweet करके शोर मचाया।
उत्तर कोरिया रॉकेट चलाए, ट्रंप बोले He’s funky, let him fly! किम जोंग संग खिंचाई फोटो, बोले He writes love letters, oh my!
भारत की बारी जब आई, Howdy Modi से झप्पी जमाई। Namaste Trump में जोश जगाया, भक्तों ने फिर GDP भुलाया।
अब जब ट्रम्प राष्ट्रपति बन गए तो अमेरिका नहीं, पूरी पृथ्वी उनके व्यवहार की मार सहने लगी। विदेश नीति का मानचित्र उन्होंने WhatsApp फ़ॉरवर्ड से बनाया। कभी रूस के पुतिन को भाई कहें, कभी चीन को वायरस कहें। कभी उत्तर कोरिया के तानाशाह से गलबहियाँ डालें और फिर भारत को हौदा में बिठाकर हाथ हिलाएँ। ‘भइया! ऐसा ‘Global Brand Ambassador of Chaos’ पहले कभी नहीं देखा!
UN Council गिनत दिवस, India माँगे सीट। ट्रम्प कहे-Modi! Great Friend!, भीतर मन गिन Tweet।। G7 बोले-‘आ भाग ले’, वो बोले ‘थोड़ा Busy’। मोदी बोले-‘मित्रता है ये?’, अरे ये है Trump की मर्जी
💰 Trumpचरित्रमानस :टैरिफकाण्ड 💰
(अर्थव्यवस्था गई तेल लेने और ट्रंपजी लगे आर्थिक युद्ध खेलने)
टैरिफ युद्ध उठ्यो भयंकर, अर्थशास्त्र काँपे भीतर। लॉजिक रह गया कोने में, बोल उठे- “कर बढ़ाओ जी भर!”
चाइना चोर! ट्रम्प हुंकारे, टैरिफ मारो! सबको निपटारे! Apple रोए, Nike थर्राया, Dollar भी थोड़ा घबराया।
Harley टैक्स करे जो भारी, भेजूँगा बम! बोले दुष्कारी। मोदी बोले -प्रभु क्या छाया? दोस्त कहे, व्यापार लड़ाया।
मोदी: “प्रभु ट्रम्प, हमारे देश में भी टेस्ला भेजिए! मगर टैक्स ज़रा कम कर दीजिए!” 🙏
ट्रम्प मुस्काते हैं: “मोदी डियर! पहले तुम Harley का टैक्स कम करो! वरना I’ll drop a Trade Bomb!” 💣
मुख कहे “मित्र”, मन में घात, टैरिफ की तलवार। व्यापारी सखा बना नहीं, बन बैठा व्यापाराचार।।
🕊️ Trumpचरित्रमानस :भारत-पाक सीजफायर 🕊️
(जहाँ ट्रंपजी ने बिना बुलाए मध्यस्थता की और भक्तों ने इतिहास बदल दिया )
भारत-पाक युद्ध समर उपज्यो, भक्तगण हर्षित गाथा गज्यो। बोले मोदीजी ने लंका जलायी! ट्रंपजी ने तुरन्त लाठी उठायी।
Tweet किया मैंने रोका युद्ध, भक्त बोले -अबे ओ! तू तो खुद झूठ! दिल्ली-लाहौर बोले-हमने किया निर्णय”, पर ट्रंप बोले -No bro, I did the surgery!
हुआ भक्तों का मन भ्रम भारी, दो भगवानों की चढ़ी सवारी। मोदीजी थे मस्तक मुकुटी, ट्रंपजी बोले-मैं हूँ शक्ति।
भक्त बोले -आहात हैं भाव ,यह तो मोदीजी की शांति पे घाव! जो पाकिस्तान को गले लगावे,वो मंदिर में पूज्य नहीं पावे!
व्हाट्सएप पर चला referendum, ट्रंप रहें या बनें मंडपम? मोदी तो भू-साक्षी है, ट्रंप बस T-shirt पे छपी इच्छा है!
Pakistan के सेनापति संग, Trump लीला भारी।
Biryani ले deal करे, America दुविधा न्यारी।।
अब ट्रंप बने फिर से बंदर, मोदी बने भक्तों का सच्चा Thunder। ट्रंप ने चाहा Nobel Peace,भक्त बोले-जा रे, खा Chinese Cheese!
तो लो भाइयों! अब वो लीला शुरू होती है, जहाँ युद्ध हुआ दो देशों में और जीत का झंडा तीसरे ने गाड़ दिया! भारत-पाक ने चुपचाप शांति समझौता किया और ट्रम्प देव बोले – ‘मेरे कारण हुआ है भाई!’UN चुप, Modi चुप, ISI भी चुप पर भक्त मचा रहे हैं #TrumpWonAgain!
जहाँ वंदन को Credit लूटे, प्रेम न हो व्यवहार। भक्त कहें -अमेरिकन मूर्ख! मोदी हमारा अवतार!
ट्रंप रहे बस सहयोगी, मंदिर में नहीं विराज। मोदी ही प्रभु, बाकी सब तो ‘foreign language’ राज॥
⚔️ Trumpचरित्रमानस: युद्धकाण्ड (ईरान धमकी)⚔️
ईरान-इज़रायल समर भयंकर। मिसाइल बरसें दिवस निशंकर॥ तेहरान-तेलअवीव विकलाए। UN बैठ मनौती गाए॥
Netanyahu को कॉल मिलाया, I love you bro! कह के हँसाया।
तेहरान को बोला -Just calm down! Else I’ll tweet, and you’ll go down.
Iran started it!” “Israel overreacted!” “Obama gave them nukes!” “I had the best peace plan—no one read it!”
और जब मिसाइल चले Televiv से Tehran तक, ट्रम्प बोले -“Who knew Middle East was so complicated?!”
श्वेतगज पर चढ़ Trump देवा,Tweet चढ़ा करे ज्यों हवन सेवा। कभी लिखा -Iran Beware!कभी लिखा -Peace…somewhere!
ईरान-इजराइल युद्ध निपटाया। Tweet शस्त्रों से जग भरमाया।। Trump Dev बोले-Peace for all! CNN बोले-Worst downfall!
ट्रम्प चरित अद्भुत अनूपा। मूढ़ मति, पर नोबेल रूपा॥ दुनिया माने या न माने। ट्रम्प बने विश्व के सयाने॥
ट्रंप बोले -I de-escalated! रात को बोले -अब escalated! Subah tweet-We love peace! Shaam को बोले -I’ll bomb at least!
नोबेल-नोबेल रट करे, देह न मन न ध्यान। Middle East is fixed by me! बोले Trump महान॥
🔱 Trumpचरित्रमानस :पूर्णाहुति श्लोक 🔱
जय हो Trump! उलटी मति धारी।
Twist-Turn नीति अति विचारी।।
कभी मित्र, कभी शत्रु प्यारा।
संसार देखे तेरा नज़ारा।।
🌺 शुद्ध हास्य की यह है वाणी, कथा चली ट्विटर-पहचानी। न्याय, धर्म, तर्क सब छूटा, जहाँ Meme बना मंत्र, और Troll बना गूढ़ सूत्रा।
🌼 मायाजाल में फंसी ये कथा, जहाँ भक्तों ने भक्ति से रचा चमत्कार। ट्रंप बने राम या हनुमान, या बस व्हाइट हाउस के TIKTok महान।
🌿 सीजफायर से लेकर युद्धघोष, हर tweet बना भक्तों का दोष। मोदी–ट्रंप द्वै-देव dilemma, Fox-News बना भक्तों का Cinema।
🌸 अब कथा को पूर्ण कहें, भक्तों को शांति का मून कहें। Emoji अर्पित, CAPS का घी, Fake News से कर ली आरती भी।
🔥 न आरंभ में ज्ञान था, न अंत में नीति, सिर्फ LIKE और RETWEET की थी गीति। So हे पाठकगण! हँसी को मानो धर्म महान, ट्रंपचरित्रमानस पूर्ण अब मिलकर कहो ‘जय ट्रंप भगवान!’
🙏 इति सम्पूर्णम् –Trumpचरित्रमानस की कथा पूर्ण हुई हर्ष-वर्षा में………………..
🚩🌟 ट्रंपचरित्र आरती 🌟🚩
🔔 आरती ओ ट्रम्प महान, उलटी बुद्धि के भगवान। ट्विटर वाले तारणहार, उलटी बोले बारम्बार॥
सुनहले केस फुलाए भारी, हवा चले तो झूमे सारी। ‘America First’ का नारा, खुद बेचें Chinese सारा॥ 🔔 आरती ओ ट्रम्प महान…
मोदी-मित्र कहें मन माहीं, पीछे बोले ताकी नौकरी छीनी! किम जोंग को भेजें Love Letter, missile threats भी दें better॥ 🔔 आरती ओ ट्रम्प महान…
ईरान को कहें-Stay Quiet!, फिर बोले -Blast Tonight! Canada बोले -True Buddy!, TV पर कहें -Bloody Fraud-y! 🔔 आरती ओ ट्रम्प महान…
कोरोना आयो तो हँसे भारी, बोले -जाएगा ज्यों बुखारी! Bleach लगा लो! दी सलाह, डॉक्टर बोले -घोर अनर्थ वाह! 🔔 आरती ओ ट्रम्प महान…
Truth Social का खोला द्वार, Twitter छूटा, झटका अपार। वोट मांगें हिलाकर टोपी, Ballot बोले-हुई चोरी! 🔔 आरती ओ ट्रम्प महान…
Golf खेलें सारे दिन भारी, White House में भी लगती यारी। China बोले -Virus भेजा!, फिर खुद PPE का किया सेजा॥ 🔔 आरती ओ ट्रम्प महान…
तू ही Putin, तू Zelensky, तू ही Modi, तू Kim Jong-ki! सब leaders में तू Champion, World Politics का Great Funman! 🔔 आरती ओ ट्रम्प महान…
दे Twitter वापिस, प्रभु हमारे! करें फिर से Tweets विचारे! फिर हो धमकी, फिर हो वार, बिना Trumpham dull संसार! 🔔 आरती ओ ट्रम्प महान…
जो कोई पढ़े ‘ट्रम्प चरित्र आरती’, हंसी में उसकी निकले भारती। कष्ट सभी उलटे हो जावें, सिर का बाल कभी न उड़ पावें! 🔔 आरती ओ ट्रम्प महान, उलटी बुद्धि के भगवान! ट्विटर वाले तारणहार, उलटी बोले बारम्बार॥
——————-इति ट्रम्पचरित्र आरती सम्पूर्णम्!—————————
🙌 बोलिए Tweetनंदन नारायण की जय! 🙌 बोलिए TruthSocialवासी प्रभु की जय! 🙌 बोलिए MAGA महापंडित की जय! 🙌 बोलिए मूर्खोत्तम मुक्तिदाता की जय!
छोड़िए ये सब बातें। इक्कीसवीं सदी का असली ज्ञान-केंद्र है—व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी। यह भारत भूमि की वह अद्वितीय पाठशाला है जहाँ दाखिला हर उस व्यक्ति को मिलता है जिसके पास दो चीज़ें हैं:
1. स्मार्टफोन
2. और दिमाग… जो दूसरों के दिमाग से चलने को राज़ी हो।।
यहाँ न फीस लगती है, न एडमिशन फॉर्म। न एंट्रेंस टेस्ट, न रिज़ल्ट। ज्ञान की गंगा हर सुबह “Good Morning” के साथ बहती है और रात होते-होते “देखिए इस वीडियो को डिलीट करने से पहले!” में तब्दील हो जाती है। यह विश्वविद्यालय न केवल ज्ञान देता है, बल्कि ज्ञान का अहंकार भी देता है। यहाँ से निकलने वाला हर छात्र एक walking-talking Encyclopedia बन जाता है और बन जाता है Google और Wikipedia के लिए भी खतरे की घंटी।
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी: “जहाँ तर्क दम तोड़ता है, वहीं ज्ञान का असली प्रकाश फूटता है!
संरचना एवं परिसर
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का कोई भौतिक परिसर नहीं है। इसका विस्तार आपकी मामी के ग्रुप से शुरू होकर आपके पापा के “देशभक्त मित्र” ग्रुप तक फैला है। इसके कुलपति कोई नहीं, लेकिन हर एडमिन अधिपति है।
हर ग्रुप एक विभाग है: –
देश की सच्चाई : राजनीतिक विज्ञान विभाग
इतिहास विभाग “अकबर नहीं लुटेरा था” थीसिस
आयुर्वेदिक इलाज और गऊ महिमा: मेडिकल और विज्ञान विभाग
जागो हिंदू जागो: सांस्कृतिक अध्ययन विभाग
प्रवेश प्रक्रिया
यहाँ ऐडमिशन में मेरिट नहीं, मूड देखा जाता है। प्रवेश हेतु योग्यता केवल इतनी है –स्मार्टफोन, एक सीमित डेटा पैक और असीमित विश्वास। एक बार ग्रुप में जुड़ जाएँ फिर न लॉजिक काम करता है न लॉजिक बोर्ड।
जिस दिन आप विज्ञान से ऊब जाएँ और इतिहास में एंटायर पॉलिटिकल साइंस मिलाना चाहें बस उसी दिन आपको एक ग्रुप में जोड़ा जाएगा और वही क्षण होगा जब आपका दिमाग व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में “Uninstall for Update” हो जाएगा।
कोर्स एवं पाठ्यक्रम
स्नातक स्तर (UG-Courses)
कोर्स
पाठ्यक्रम
B.A. (भ्रमाचार्य)
1.प्राचीन भारत में प्लास्टिक सर्जरी और इंटरनेट 2. मुगल = आतंकवादी (व्याकरण की अनुमति से) 3. हर मुसलमान पाकिस्तान का एजेंट है जब तक वो बीजेपी में ना आ जाए
B.Sc. (जैविक विज्ञान)
शुद्ध देसी गोमूत्र से कोरोना भी भागता है।
B.A. (राजनीति का विज्ञान )
1. जानिए ताजमहल दरअसल तेजोमहालय है। 2. नेहरू नहीं होता तो पाकिस्तान हमारा होता
परास्नातक स्तर(PG- Courses)
कोर्स
पाठ्यक्रम
M.A. (वास्तविकता का विमर्श)
1.हर न्यूज़ चैनल बिक चुका है लेकिन आपका फॉरवर्ड सत्य का अंतिम स्तंभ है। 2. UNESCO ने मोदी को विश्वगुरु घोषित किया
M.Sc. (मिथ्या साइंस)
1. गोमूत्र और कैंसर: जो बोले वही कैंसरग्रस्त है 2. 5G टावर से बांझपन कैसे बढ़े 3. दूध में हल्दी मिलाओ, ब्रह्मा तक जीवित हो जाएँगे
M.A. (विश्व षड्यंत्र शास्त्र )
बिल गेट्स का टीका, 5G टावर और चिप्स से आपका डीएनए बदला जा रहा है।
PHD (Doctor of Philosophy)
PHD (एंटायर पोलिटिकल साइंस)
वीर सावरकर महान स्वतंत्रता सैनानी
नेहरू की आत्मा हर समस्या की जड़ है
“इस्लामी जनसंख्या विस्फोट: एक काल्पनिक अध्ययन”
गोपाल कृष्ण गोखले बनाम WhatsApp गोपाल -तुलनात्मक अध्ययन
PhD (फॉरवर्ड ध्वनि प्रचार)
क्यों विपक्ष राष्ट्रविरोधी है?
गांधी नहीं, गोडसे महान था-एविडेंस: अनाम JPEG
मोदी = 56 इंच = 560 IQ = ब्रह्मांडीय नेता
पाठ्यपुस्तकें
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की किताबें .jpeg, .png और .mp4 फॉर्मेट में आती हैं। टेक्स्ट बमुश्किल दो लाइन का होता है और दावा ब्रह्मवाक्य सरीखा-“सारे मीडिया वाले छुपा रहे हैं, आप तक सच्चाई पहुंचाएँ।” ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर करें। जय श्री राम !”
प्रशिक्षकगण
यहाँ हर कोई प्रोफेसर है, हर कोई गुरु है। आपकी कॉलोनी के मिश्रा जी जो कभी बिजली का बिल नहीं भरते, आज अमेरिका की चुनावी नीति समझा रहे हैं। कोचिंग की क्या ज़रूरत जब फॉरवर्ड वाला चुटकुला ही अनपढ़ से IAS” बना दे। प्रो. मवाली रंजन: जो हर पोस्ट के बाद “अबे बिकाऊ है तू” कहकर बहस समाप्त मानते हैं। श्रीमान देशभक्त नारायण उर्फ़ ठुल्ला चाचा: जो हर सुबह “सच्चाई छुपाई जा रही है!” कहकर 2013 का वीडियो भेजते हैं। डॉ. पम्मी जी: जो हल्दी, नींबू और तुलसी से प्लूटो तक की यात्रा करवा देती हैं।
प्रश्नपत्र का स्वरूप (SAMPLE PAPER)
परीक्षा प्रणाली: जब कुतर्क ही उत्तरपत्र हो ।
निम्नलिखित प्रश्नों की तैयारी की जा सकती है।
प्रश्न 1: राहुल गांधी ने दाढ़ी क्यों बढ़ाई? क्या यह तालिबानी सोच का प्रतीक है?
प्रश्न 2: ताजमहल को तोड़ा जाए या हिन्दू वेरिएंट में पुनर्निर्माण हो? उत्तर दें… गुस्से में।
प्रश्न 3: “देश को खतरा है…” इस वाक्य को पूरा करें बिना किसी रिसर्च के।
प्रश्न 4: अरविन्द केजरीवाल की एक तस्वीर देखकर बताइए कि वह किस साजिश में लिप्त हैं?
प्रश्न 5: गोमूत्र में कितने प्रकार के रोग समाप्त होते हैं (आपका अनुभव बताएँ)?
प्रश्न 6: “मोदी भारत के रक्षक हैं…” इस वाक्य को पूरा कर 500 शब्दों का निबंध लिखिए।
Note:उत्तर देने की शैली: Caps Lock में, अंत में तीन बार “जय श्रीराम” और बीच-बीच में “कांग्रेसियों की तो…Dash..Dash…” जैसी साहित्यिक गालियाँ अनिवार्य।
तैयारी करने के लिए निम्नलिखित गतिविधियां अनिवार्य हैं::
1. न्यूज़ चैनल बंद कर के ज्ञानवापी पर डिस्कशन
2. गाय की पीठ पर सूर्यास्त होते देखना
3. हर हफ्ते किसी नए मुस्लिम बच्चे को आतंकवादी घोषित करना -“सांस्कृतिक Bingo” खेलते हुए
प्रसिद्ध Alumni (पूर्व छात्र)
चचा राष्ट्रवादी:– जो हर बहस में पाकिस्तान भेजने की अंतिम चेतावनी देते हैं।
गौतम ज्ञानपुंज:– जो हर वैक्सीन को विष बता चुके हैं और फिर चुपचाप लगवा भी चुके हैं।
सावित्री संस्कृति देवी:– जो 5G से संस्कार बर्बाद होने पर चिंतित हैं, पर रील्स लगातार बनाती हैं।
देशभक्त भैया जी:– हर वीडियो की शुरुआत “ये देखो मीडिया नहीं दिखाएगा” से करते हैं।
भारत माता की दीदी:– जिनके अनुसार टमाटर महंगे होने की वजह भी औरतों की आज़ादी है।
न्यू इंडिया अंकल:– जो हर WhatsApp फॉरवर्ड को RTI के जवाब से बड़ा मानते हैं।
उपसंहार
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी एक विचार नहीं मिशन है। इसका उद्देश्य है- तथ्य का पोस्टमार्टम और अफवाहों का महात्म्यकरण। यहाँ हर झूठ पर “सच की मुहर” लगी होती है और हर तर्क “देशद्रोह” के कटघरे में खड़ा होता है।
“श्रद्धा का जतन करें, तर्क का त्याग करें, यही WhatsApp धर्म है!”
तो दोस्तों, अगली बार जब आप “देखिए मोदी जी ने क्या कर दिखाया” या “ये वीडियो डिलीट होने से पहले देख लीजिए” जैसे संदेश देखें तो जान लीजिए आप यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में बैठ चुके हैं। प्रोफेसर शर्मा जी लेक्चर शुरू कर चुके हैं। यह संस्थान केवल ज्ञान नहीं देता, ज्ञान का ईगो देता है। यहाँ से निकलने वाला छात्र हँसता नहीं, दूसरों को हँसने लायक नहीं समझता। वो डॉक्टर, इंजीनियर, इतिहासकार, गूगल, विकिपीडिया – सबको गलत साबित कर चुका होता है… अपने फॉरवर्ड से।
तो देर किस बात की? जुड़िए इस महान ज्ञान यात्रा में। “देखिए, ये पोस्ट डिलीट होने से पहले ज़रूर पढ़ लीजिए…” इस अद्भुत विश्वविद्यालय में नाम लिखवाइए, सवाल पूछने की क्षमता त्यागिए, और फेसबुक-ट्विटर पर राष्ट्र निर्माण में जुट जाइए। क्योंकि जहाँ तर्क की हार होती है, वहाँ व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की शुरुआत होती है ।
“ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें। जय श्री राम!”
नोट: यह ब्लॉग पूरी तरह व्यंग्य है। जो पढ़े, वो समझे। जो न समझे…उसका एडमिशन पक्का है।
आभासी मुस्कानों की माया, छाया-सी लगती है, Emoji की भीड़ भरी, पर मन की दुनिया जगती है Get well soon के संदेशों में, स्पर्श कहाँ खो जाता है? Digital सागर में मन, तृषित मृग-सा भटकता है।
Screen चमकें, नयन थकें, पर दीप नहीं जलते हैं, Follower की बढ़ती गिनती में, साथी कहाँ मिलते हैं? Chat Box के शब्दों में तो, केवल ध्वनि की गूँज रही, Real hug की उष्णता अब, Pixel में क्यों सूख रही।
Happy Birthday! हर कोने में, संदेशों का शोर बड़ा, Inbox में उत्सव जैसे, पर दरवाज़े पर कोई नहीं खड़ा केक कटे पर कोई न पास, मोमबत्ती भी तनहा जली, Photos upload हो जाती, पर आत्मा भीतर से खाली।
Friend Request हज़ारों हैं, पर दोस्ती का भाव नहीं, Timeline में मुस्कानें हैं, पर रिश्तों में प्रभाव नहीं। Like मिले पर साथ न कोई, Comment भी बस औपचारिक, स्मृति-संधान की तस्वीरों में, मन की व्यथा भी सार्वजनिक।
मन पुकारे- चलो बाहर, उन बिछड़े आँगनों तक, जहाँ धूप सुनहरी चहके, चाय की प्यालियों तक। जहाँ बुज़ुर्गों की चौपालों में, फिर किस्से दोहराए जाएँ, जहाँ किताबें हाथ पकड़ें, और नज़दीकियाँ मुस्काएँ।
पर समय तो कैद पड़ा है, Click-Click के व्यापार में, मोबाइल स्क्रीन के पीछे, उलझे हर इक यार में। कौन समय अब दे सुनने को? किसे परवाह हमारी है? Virtual ने बाँध लिया है, ये भी कैसी लाचारी है।
फिर भी आशा बाँध रखे है, मन की कोर में नर्म कहीं, शायद कोई कल दस्तक दे, धूप लिए उस आँगन से यहीं। हाथ बढ़ाकर बोलेगा-“यार! चल चाय पीते हैं,” Emoji से बाहर आकर, असली हँसी जीते हैं।